अपने ही लोगों को ललकारा, कितना सही है निहंगों का उत्तराखंड बॉर्डर पर यह व्यवहार, पढ़िए हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार डॉ रमेश खन्ना का लेख….
उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में 16 जून को स्थानीय लोगों और निहंगों के बीच विवाद मामला लगातार आगे बढ़ते हुए राज्य की सीमाओं पर अन्य राज्यों से आए निहंगों के बड़े प्रदर्शन में बदलता दिखाई दिया, इसी परिदृश्य के मद्देनजर सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को समर्पित लेखक के विचार….
हेमकुंड साहिब धार्मिक स्थल हम उत्तराखंडी लोगों के लिऐ धाम से कम नहीं है पहले जत्थेदार अगर कोई रहा है तो उत्तराखंडी नंदा सिंह चौहान थे…धर्मों का सम्मान उत्तराखंडी समझता है,सिख समाज दयालु सेवाभाव वाला होता हैं….अमीर हो गरीब हो एक भाव से मिलकर लंगर से लेकर मदद सब करते हैं संदेश देते हैं मिलकर रहो प्रेम से रहो,निहंग आप कह सकते हो रक्षा के लिऐ बनी एक ऐसी सेना है जब जब धर्म पर मानव पर जुल्म हुआ है तो निहंग आगे आकर मदद करते हैं इनका जीवन मानव कल्याण और धर्म रक्षा के लिए है….इनका जीवन समाज और धर्म के लिए समर्पित है।

आज मन बड़ा व्यथित है जिन्हें मानव कल्याण सौहार्द बनाना चाहिए गुरू गोविंद सिंह साहेब के रास्ते पर चलना और लोगों को चलने के लिऐ प्रेरित करना चाहिए था वो हेमकुंड साहिब धार्मिक स्थल के मूल्यों के विपरीत आचरण कर रहे हैं…यह गुरु गोविंद साहेब जी का संदेश नहीं हो सकता, प्रेम प्यार से जीने वाली सिख समाज में ये कैसे निहंग है जो अपने ही लोगों को ललकार रहे हैं तलवारे निकाल रहे हैं… ऐसा नहीं होना चाहिए, हम सब एक है लड़कर कल्याण नहीं होगा कोई विवाद है तो बैठकर समाधान करो तभी भला है…
मेरा सवाल है हुड़दंगी हुड़दंगी होता है उसकी पहचान कोई नहीं होती….ऐसे लोगों पर रोक लगना जरूरी है…वर्ना अराजकता फ़ैल जायेगी, उत्तराखंडी हर धर्मो के रक्षक है सिख भी सभी धर्मो के रक्षक हैं तो फिर यह ललकार क्यों और इससे क्या फायदा होगा…गुरु गोविंद साहेब जी के आदर्श पर चलना ही जीवन है, मत करो धर्मों को बदनाम हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में है भाई भाई, जय उत्तराखंड…
पंजाब में कोरोना काल में पुलिस का हाथ काटने वाले कौन थे, दिल्ली लालकिले पर तांडव करने वाले कौन थे…. ऐसे ही मामूली विवाद को रंग देने वाले कौन हैं यह स्वयं सिख समाज तय करेगा इन्हें रोकेगा, उत्तराखंड में वन है हिमालय में अधिक शोर वर्जित है ऐसे में मोटर साइकल का साइलेंसर निकालकर तीन-तीन एक मोटर सायकिल पर बैठकर शोर शराबा करना कौन सी धार्मिक यात्रा है… इस पर सवाल खड़े करने चाहिए, राजा जी नेशनल पार्क गोविंद पशु विहार अधिक शोर से हिमालय क्षेत्र परेशान होता है, इस ओर चिंतन कौन करेगा….सोचना चाहिए… गुरु गोविंद साहेब एकांत में आए थे और आप उस एकांत को शोर से खराब कर रहे हैं….सोच बदलो, गुरु गोविंद साहेब के आदर्शों पर चलो तभी सबका कल्याण होगा…
