September 5, 2026

हरिद्वार कनखल का विश्व प्रसिद्ध पौराणिक सतीकुंड के सौंदर्यीकरण पर खड़े हुए बडे सवाल, पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार डॉ रमेश खन्ना का लेख…

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दोस्तों इस जगह को तो पहचानते होंगे आप,जी हां हरिद्वार के कनखल का विश्व प्रसिद्ध पौराणिक सतीकुंड , वही जहां राजा दक्ष के हवन कुंड में कूद कर माता सती हुई थी। अर्ध कुंभ 2027 जिसे जबरन कुंभ कहा जा रहा है उसमें इस कुंड का सौंदर्य करण किया जा रहा है और इसका बजट लगभग 65 करोड रुपए का निर्धारित किया गया है , पूर्व गंगा सभा के अध्यक्ष एवं संघ के बेहद कर्मठ स्वयंसेवक अशोक त्रिपाठी द्वारा इस विषय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारी भ्रष्टाचार का आरोप कुंभ मेला प्रतिष्ठान पर लगाया है। उनके साथ-साथ अधिकांश हरिद्वार वासी का यह भी मत है की पौराणिक सतीकुंड को पौराणिक स्वरूप में ही विकसित किया जाना ही उचित है, ना की पिकनिक स्पॉट के रूप में सौंदर्यकरण किया जाना। 

           खैर इसमें अलग-अलग लोगों का अलग-अलग मत हो सकता है फिलहाल बात सौंदर्य करण की करते हैं नीचे चित्र में वर्तमान सतीकुंड जिस स्वरुप में है ,उसकी फोटो है एवं AI से भविष्य में इसका क्या स्वरूप सौंदर्य करण के बाद सामने आ सकता है ,इसका एक प्रारूप है। मैंने AI से इसका एक प्रारूप बनाया है एवं इसमें आने वाली लागत का भी आकलन करवाया है। AI द्वारा विश्व की सर्वोत्तम तकनीक के आधार पर इसका आकलन लगभग 22 करोड रुपए का किया है,यह अधिकतम अनुमानित खर्च है। जो लगभग 1 लाख स्क्वायर फीट से अधिक के आधार पर बनवाया गया है । जबकि सुनने में आ रहा है की मेला प्राधिकरण इसी काम के लगभग 65 करोड रुपए खर्च कर रहा है। ऐसे में आदरणीय अशोक त्रिपाठी जी के आरोप में दम दिखाई देता है। हां अगर योजना ठीक इसी प्रकार की बनती है और इसमें 40 किलो सोना लगाया जाता है तब तो यह बजट ठीक है बिना 40 किलो सोना लगाए हुए , विश्व की सर्वोत्तम तकनीक एवं गुणवत्ता एवं मैटिरीएल लगाए बिना अगर निर्माण होता है , तो निश्चित रूप से एक भारी भ्रष्टाचार होगा। अब हम हरिद्वार वीडियो को यह तय करना है इतना भारी भ्रष्टाचार एक प्रोजेक्ट में होने देना है अथवा नहीं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं कुंभ मेला अधिकारी को इस विषय में अपनी सफाई रखनी चाहिए अन्यथा ये माना जाएगा उनका भी सहयोग एवं स्वीकृति इस प्रोजेक्ट के प्रति है। आदरणीय अशोक त्रिपाठी जी का आभार कि उन्होंने हरिद्वार वासी होने का फर्ज निभाते हुए इस भ्रष्टाचार को सामने लाने का कार्य किया है। अब देखना यह है हरिद्वार के जनप्रतिनिधि और समाजसेवी इस विषय में क्या करते हैं?

यह लेख उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार डॉ रमेश खन्ना के द्वारा लिखा गया है।

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