February 5, 2026

राजस्व परिषद का वर्चस्व, गढ़वाल कमिश्नर कोर्ट ने बीएचईएल को दिया था कब्ज़े का आदेश, राजस्व परिषद के पूर्व पदासीन ने कर दिया खेल…

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हरिद्वार में राजस्व परिषद का वर्चस्व अपने ही रंग भरता नज़र आता है जमीनों के खेल में आये राजस्व परिषद की भूमिका चर्चाओं का बाजार गर्म कर देती है और चर्चाओं का बाज़ार गर्म हो भी क्यों ना ज़मीनों की कीमत का आंकलन भी करोड़ों में बताया जाता है हरिद्वार में बीएचईएल की ज़मीन से जुड़े एक मामले में फिर राजस्व परिषद ने फिर हवा भर दी है जानिए क्या है पूरा मामला…

 जिस वादकारी के वाद को मंडलायुक्त गढ़वाल मंडल की कोर्ट ने खारिज कर कब्जा हटाने का आदेश दिया था। अब परिषद ने उसे एक माह की मोहलत दे दी। इससे बीएचईएल को अपनी ही जमीन से अतिक्रमण हटाने के अभियान पर विराम लग गया है।

भूमि खसरा संख्या 373 जो ग्राम रानीपुर परगना ज्वालापुर में है। इस पर अवैध तरीके से कब्जा करने का आरोप बीएचईएल ने लगाया था। इसी भूमि को नी पुश्तैनी भूमि बताते हुए एक पक्ष ने 2016 में वाद दायर किया था।

बीएचईएल बनाम नकली राम व अन्य जमले में सुनवाई करते हुए आयुक्त ब्ल मंडल विनय शंकर पांडेय की ये वाद निरस्त होते ही बीएचईएल को राहत मिली थी।

17 जून को कमिश्नर कोर्ट से जारी आदेश की प्रति बीएचईएल को मिली थी। आदेश मिलते ही बीएचईएल संपदा अधिकारी व नगर प्रशासक संजय पंवार ने वादी मुकदमा के अवैध कब्जे को ध्वस्त कर अपने कब्जे में ले लिया था।

अब इसी भूमि पर राजस्व परिषद के सदस्य जो पूर्व में बड़े पदों पर आसीन थे, उन्होंने करीब 9 बीघा रकबा पर स्थगनादेश जारी कर दिया। बावजूद इसके कि कमिश्नर कोर्ट ने नकलीराम पुत्र बीरू का नाम खारिज करते हुए पूर्व की भांति बीएचईएल का नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। आदेश की प्रति प्राप्त होने पर उपजिलाधिकारी के निर्देश पर मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की गई और पुलिस बल की मौजूदगी में अवैध अतिक्रमण को हटाया गया था।

इससे पूर्व वादी ने मांगा था चार दिन का समय…

बीएचईएल के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने वाले वादी नकली राम व अन्य ने प्रशासन से चार दिन का समय मांगा था। उनका तर्क था कि वह भूमि पर किए गए कब्जे को हटाकर स्वतः प्रशासन को अवगत कराएंगे। नगर प्रशासक संजय पंवार ने उन्हें समय देकर इंतजार किया। इसी बीच 17 जून के कमिश्नर के आदेश के विरुद्ध राजस्व परिषद का स्थगनादेश आ गया। अब मामले में 17 जुलाई को सुनवाई परिषद में होगी।

इससे पहले राजस्व परिषद ने जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह के कार्यकाल में ऋषिकुल की जमीन में कर दिया था खेल…

राजस्व परिषद का यह दूसरा मामला है जब हरिद्वार जिले के भूमि विवाद मामले में तत्परता से निर्णय लिया जा रहा है। इससे पूर्व राजस्व परिषद ने ऋषिकुल की जमीन जो कि विकास कॉलोनी में मौजूद उसे दिल्ली के एक व्यक्ति के नाम दर्ज करने का आदेश दिया था। इस मामले में तत्कालीन उप जिलाधिकारी अजयवीर सिंह ने भी मामले का अध्ययन नहीं किया और भूमि अभिलेखों में दूसरे के नाम दर्ज कर दिया। इस मामले को लेकर जैसे ही चर्चाओं का गुबार उठा तो तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह ने राजस्व परिषद के आदेश के विरुद्ध त्वरित कदम उठाया और आपत्ति दर्ज की। फिलहाल, ऋषिकुल की जमीन अभिलेखों में दर्ज होने के प्रकरण में अभी कोई निर्णय नहीं आया। इसी बीच नगर निगम में जमीन खरीद मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह निलंबित हो गए।

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