व्यवहार की श्रेष्ठता, मानवीय मूल्यों का गुण, आईएएस दीपक रावत ने महिला कैदियों के साथ रक्षाबंधन मनाकर दिया बड़ा संदेश…
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मानवीय संवेदनाओं का सर्वोच्च गुण हमेशा व्यक्ति के जीवन में झलकता है लेकिन किसी सार्वजनिक क्षेत्र में काम करने वाले अधिकारी का व्यवहार और उसके नैतिक मूल्य पूरे समाज को प्रभावित करते है… कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर फिर ऐसे ही शब्दों की सार्थकता को सिद्ध कर दिया…
कमिश्नर दीपक रावत अपनी पत्नी विजेता रावत के साथ हल्द्वानी जेल पहुँचे जहां उन्होंने 24 महिला कैदियों से राखी बंधवाकर रक्षाबंधन मनाया, कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने कहा कि उन्होंने जेल सुपरिटेंडेंट संजय पांडेय से इस मामले को लेकर शुक्रवार को ही बात की थी. जिसके बाद जेल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि यहां 24 महिलाएं हैं, जो जेल में बंद हैं. कई महिलाओं के भाई रक्षाबंधन पर उनसे राखी बंधवाने नहीं आ रहे हैं. ऐसे में उन्होंने अपना कर्तव्य निभाते हुए रक्षाबंधन के मौके पर जेल में पहुंचकर महिला बंदियों के हाथों से राखी बंधवाई और उनको शुभकामनाएं दी. इस दौरान उन्होंने महिला कैदियों से व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी ली. दीपक रावत ने बताया कि महिलाएं पूरी तरह से संतुष्ट नजर आईं. मैंने उन्हें हर संभव मदद करने का भी आश्वासन दिया।
आईएएस दीपक रावत हमेशा अपनी प्रभावी कार्यशैली और कुशल व्यवहार के लिए जाने जाते है रक्षाबंधन के अवसर पर महिला कैदियों के बीच उनकी उपस्थिति दर्शाती है कि व्यवहार की श्रेष्ठता किसी के भी जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ा सकती है।
