धामी सरकार में उत्तराखंड की खनन नीति बनी मिसाल, जम्मू-कश्मीर की टीम करेगी अध्ययन, खनन निदेशक राजपाल लेघा की मेहनत ला रही रंग…
कर्म का फल और प्रगति का शिखर किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को उसको कार्यों के अनुरूप सदैव मिलता है… और जब पारदर्शी व्यवस्था के प्रति समर्पित सोच का जज़्बा हो तो परिणाम का डंका भी देशभर में बजने लगता है…कुछ इसी तरह खनन निदेशक राजपाल लेघा के दिशानिर्देशन में उत्तराखंड की खनन नीति अपनी व्यवस्था का डंका देशभर में बजा रही है…
उत्तराखंड की सख्त और तकनीक-आधारित खनन नीति अब अन्य राज्यों के लिए मॉडल बनती जा रही है। इसी कड़ी में जम्मू और कश्मीर सरकार की एक उच्चस्तरीय टीम 18 से 22 अगस्त 2025 तक उत्तराखंड के दौरे पर आ रही है, जहां वे राज्य की “खनन के डिजिटल बदलाव और निगरानी प्रणाली” का गहन अध्ययन करेगी..
उत्तराखंड के निदेशक खनन राजपाल लेघा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस दौरे का उद्देश्य उत्तराखंड में लागू की गई खनन निगरानी व्यवस्था को समझना है, जिसे अवैध खनन और खनिजों की ढुलाई पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए M/S ITI Limited के सहयोग से विकसित किया गया है। इस प्रणाली के अंतर्गत बॉर्डर पर हाई-टेक कैमरे, बैरियर और एलईडी डिस्प्ले लगाए गए हैं, साथ ही देहरादून में एक अत्याधुनिक कंट्रोल सेंटर और जिलों में छोटे कमांड सेंटर भी स्थापित किए गए हैं।
उत्तराखंड की भूविज्ञान एवं खनन निदेशालय की इस प्रभावशाली व्यवस्था को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के खनन विभाग ने भी ऐसी ही प्रणाली अपनाने की योजना बनाई है। इसी क्रम में निदेशक एस.पी. रुखवाल के नेतृत्व में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल देहरादून और अहमदाबाद का दौरा करेगा।
इस अध्ययन यात्रा से यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड की खनन नीति और तकनीकी निगरानी व्यवस्था न केवल राज्य में खनन गतिविधियों को पारदर्शी बना रही है, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श साबित हो रही है।


