हरिद्वार विकास प्राधिकरण में तैनाती का खेल, सीएम धामी की पारदर्शी व्यवस्था को चुनौती देते विभाग के कुछ अधिकारी….

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हरिद्वार: अधिकारी के अधिकारों में जब भ्रष्टाचार का विकार उभरने लगे तो किसी राज्य के मुख्यमंत्री की पारदर्शी नीति ज़ीरो टॉलरेंस का लक्ष्य शून्य करने में विभागीय अधिकारी भी कोई कमी नहीं छोड़ते… कुछ इसी तरह नियम कायदों की व्यवस्था के आड़ में  कुछ चर्चित अधिकारी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ईमानदार छवि को धूमिल करने के लिए उत्तराखंड आवास एव नगर विकास प्राधिकरण में नियम विरुद्ध जबरदस्ती एक ऐसे अधिकारी को डेपुटेशन पर ले आये.. जो  यहाँ आ  ही नहीं सकता ..खास बात ये है कि इन चर्चित अधिकारियों ने यूपी निर्माण निगम के अफसर राजन सिंह को HRDA में भी विशेष तैनाती दिलाकर कुछ अवसरों की जगह बनाने की कोशिश तो की साथ ही ये  भी स्पष्ट कर दिया कि क्या उत्तराखंड में कोई लायक अधिकारी नहीं बचा जो हरिद्वार विकास प्राधिकरण में अपनी सेवाएं दे सके .. बीते दिनों हरिद्वार में हुए करोड़ों के नगर निगम घोटाले में चंद अधिकारियों ने जनता के पैसे का बंदर बाट बड़े सिस्टमैटिक तरीके से करने की कोशिश की थी…वर्तमान समय में भी शासन ओर एचआरडीए के अधिकारी कुंभ मेले से पहले मन मर्जी के तैनाती का एकजाल तैयार करने में सफल हुए.. 

विस्तार से समझिए उडा ओर एचआरडीए में तैनाती का पूरा व्यवस्था क्रम.. जिसमें शुरू से ही  भ्रष्टाचार की दुर्गंध आ रही है..

अगले वर्ष 2027 में तीर्थ नगरी हरिद्वार में कुंभ का आयोजन होना है इस आयोजन को  लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देश है कि गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य चाहे स्थाई हो या अस्थाई उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूर्ण करने का कार्य किया जाये..लेकिन कुछ अधिकारी ऐसे हैं जिनके कारण कुंभ में निर्माण कार्यों को लेकर अभी से ही भ्रष्टाचार की बू आने लगी है.. निर्माण कार्यों को लेकर HRDA में ऐसे अधिकारी की तैनाती हुई है जो न तो नियम संगत है और न ही पद के अनुरूप है..निर्माण कार्यों के लिए यूपी निर्माण निगम के अधिशासी अभियंता को कुंभ के लिए अधीक्षण अभियंता के रूप में नियम विरुद्ध तैनाती दी गई है.. आपको बता दे कि  HRDA में अधीक्षण अभियंता का पद कभी सृजित नहीं था …  यानी कि अब सिर्फ “फर्जी पद” ही नहीं… बल्कि इस पद पर राजन सिंह को फर्जी डेपुटेशन भी देने का काम हुआ है जो नियमों की खुली अनदेखी  का मामला है. हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण में तैनात अधिकारी राजन सिंह पर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं… सवाल यह है कि राजन सिंह का सरकारी रिकॉर्ड यानी पद अधिशासी अभियंता का है लेकिन जहां उन्हें डेप्यूटेशन पर बुलाया गया है तो वहां पदनाम अधीक्षण अभियंता लिखा हुआ है.. दूसरा सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस अधिकारी को यूपी निर्माण निगम से बुलाया गया है जबकि यूपी निर्माण निगम को पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र  सिंह रावत ने अपने शासनकाल में ब्लैक लिस्ट कर दिया था.. ऐसे में इस अधिकारी को किस काम के लिए यहां पर बुलाया गया है यह संदेह पैदा कर रहा है..

आपको बता दे की राजन सिंह अपनी सर्विस के उस पड़ाव पर है यहां उन्हें अपने मूल विभाग में सेवा देनी चाहिए … क्योंकि राजन सिंह की उम्र 55 वर्ष (15 जुलाई 1969) हो चुकी है और नियम कहते है कि 55 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले अधिकारी या कर्मचारी को अपने मूल विभाग में तैनाती देनी होती है … ताकि वह कम से कम अपनी सेवा के बचे हुए 5 वर्ष अपने मूल विभाग में सर्विस कर सके.  लेकिन यहां पर खेल उल्टा हो रहा है उन्हें इस उम्र में डेपुटेशन पर लाया गया..जो नियम विरुद्ध है…उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम… उत्तराखण्ड में ब्लैकलिस्ट है.ओर उसके  भ्रष्टाचार के कई मामलों की जांच भी चल रही है … ऐसे विभाग से अधिकारी को लाकर अहम जिम्मेदारी देना अपने में बड़ा सवाल खड़े कर रहा है. फर्जी पद का इस्तेमाल ….. नियम विरुद्ध डेपुटेशन… और अब ब्लैकलिस्ट विभाग का कनेक्शन! आखिर क्या गुल खिलाएगा कुंभ के निर्माण कार्यों में ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन इस तरह की लापरवाही से या पूरा सिस्टम पर सवाल जरूर उठने लगे है।

इस पूरे प्रकरण में शासन के आदेश पर भी शंका उत्पन्न हो रही है … जिसमे प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम का एक पत्र 23 सितंबर 2025 को जारी हुआ था जिसमें कहा गया है कि अधिशासी अभियंता राजन सिंह को उत्तर प्रदेश निर्माण निगम से कार्य मुक्ति का 3 वर्ष के लिए उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण में अधीक्षण अभियंता के पद पर तैनात किया जाता है साथ ही उन्हें अधिशासी अभियंता का भी अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है लेकिन नियम यह कहते हैं कि 55 साल की सेवा पूर्ण कर चुके आधिकारिक कर्मचारियों को डेपुटेशन पर नहीं भेजा जाता है बल्कि उन्हें मूल विभाग में तैनाती देने का काम होता है लेकिन यहां पर मामला उलटा नजर आ रहा है साथ ही उन्हें कुंभ मेला हरिद्वार तथा प्रधानमंत्री के अति विशिष्ट कार्य यूनिटी मॉल निर्माण की जिम्मेदारी भी दी गई….अब देखने वाली बात होगी की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस अति गंभीर मसले को कैसे लेते है..

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