हरिद्वार में अवैध खनन बन जायेगा सपना, सीएम धामी के सख्त आदेश, निदेशक राजपाल लेघा ने ग्राउंड जीरो से शुरू की कार्रवाई, कई क्रेशर सीज…

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हरिद्वार: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खनन नीति को उत्तराखंड के राजस्व का खजाना कैसा बनाया उसकी एकमात्र पटकथा सिर्फ पारदर्शी व्यवस्था है वो खनन नीति साल दर साल भ्रष्टचार का पोषक नहीं बल्कि प्रदेश के राजस्व के भंडार का केंद्र बनकर उभरी… सीएम धामी के लक्ष्य को धरातल पर साकार करते खनन निदेशक राजपाल लेघा की कार्यशैली ने स्थापित हो चुकी भ्रष्ट व्यवस्था की कमर तोड़ दी… हरिद्वार में लगातार सीज होते क्रेशरों ने निदेशक खनन राजपाल लेघा की कार्यशैली को स्पष्ट करते हुए बता दिया कि अनियमितता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी….

खनन निदेशक राजपाल लेघा के नेतृत्व में चलाए गए विशेष अभियान ने हरिद्वार जिले के लक्सर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन माफियाओं की कमर तोड़ दी है। इस बड़ी कार्रवाई में 14 स्टोन क्रेशरों को सीज कर दिया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के बाद भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय, देहरादून द्वारा एक विशेष प्रवर्तन दल का गठन किया गया। इस टीम ने 17 मार्च 2026 को लक्सर तहसील और हरिद्वार क्षेत्र के विभिन्न गांवों—बाड़ीतिप, फतवा, महतोली, मुजफ्फरपुर गुर्जर, नेहंदपुर और जवाहरखान (वीरवर)—में एक साथ छापेमारी कर बड़ी अनियमितताओं का खुलासा किया।

जांच के दौरान सामने आया कि कई स्टोन क्रेशर नियमों को ताक पर रखकर अवैध खनन सामग्री का भंडारण कर रहे थे। इतना ही नहीं, दस्तावेजों में भी भारी गड़बड़ियां पाई गईं, जो सीधे तौर पर बड़े स्तर पर चल रहे “खनन खेल” की ओर इशारा करती हैं। इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए एमएमडीआर एक्ट 1957 की धारा 23-सी और उत्तराखंड खनिज नियमावली 2021 के तहत सभी 14 क्रेशरों को सीज कर दिया गया। साथ ही ई-रवन्ना पोर्टल पर भी इन्हें निलंबित कर दिया गया, जिससे इनके संचालन पर पूरी तरह रोक लग गई।

प्रारंभिक जांच में यह अनुमान लगाया गया है कि इस अवैध गतिविधि से सरकार को 10 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। अब विभाग इन संचालकों के खिलाफ भारी अर्थदंड की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। जिन क्रेशरों पर कार्रवाई हुई, उनमें हाईवे कंस्ट्रक्शन एंड क्रेशर, सिंह स्टोन क्रेशर, किसान स्टोन क्रेशर, शुभ, सूर्य, तुलसी, नेशनल एसोसिएट्स, लिसरा इंडस्ट्रीज, दून, गणपति, वालिया, मां गंगा, अलकनंदा और एसएमएस स्टोन क्रेशर शामिल हैं।

इस पूरे अभियान में खनन विभाग के अधिकारियों की सक्रियता और समन्वय देखने लायक था। उप निदेशक से लेकर खान निरीक्षक और सर्वेक्षक तक सभी ने मिलकर इस कार्रवाई को सफल बनाया। लेकिन सबसे अहम भूमिका रही निदेशक राजपाल लेघा की, जिनकी सख्त निगरानी और स्पष्ट रणनीति के चलते यह बड़ा खुलासा संभव हो पाया।

राजपाल लेघा ने साफ संदेश दिया है कि उत्तराखंड में अवैध खनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका यह कड़ा रुख न केवल माफियाओं के लिए चेतावनी है, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी और जवाबदेही का भी मजबूत उदाहरण है।

धामी सरकार ने खनन नीति निर्धारण और पारदर्शी जवाबदेही से कभी स्वयं को अलग नहीं किया लगातार बढ़ता राजस्व औऱ खनन विभाग की बेहिझक कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड खनन विभाग किसी भी कार्रवाई से नहीं चुकेगा. आज फिर निदेशक राजपाल लेघा ने तत्काल अवैध खनन पर एक्शन लेकर अपनी मंशा साफ़ कर दी।

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