सीएम पुष्कर सिंह धामी का एक्शन,सिस्टम में सुस्ती नहीं होगी बर्दाश्त, जनसमस्याओं का समाधान बनें अधिकारियों की सर्वोच्च प्राथमिकता….
उत्तराखंड में इन दिनों फाइलों की धूल उड़ रही है क्योंकि अब कुर्सियों की आरामगाह पर बैठे अधिकारियों को मैदान की मिट्टी याद दिलाई जा रही है और इस बदलाव के केंद्र में हैं पुष्कर सिंह धामी जिनका अंदाज अब धाकड़ से आगे बढ़कर धुरंधर होता दिख रहा है
पहले शिकायतें हेल्पलाइन में दर्ज होती थीं फिर सिस्टम के गलियारों में घूमती थीं और आखिर में “कार्यवाही जारी है” की चादर ओढ़कर सो जाती थीं लेकिन अब कहानी पलट गई है मुख्यमंत्री खुद शिकायतकर्ता के दरवाजे पहुंच रहे हैं तो फाइलों की नींद टूटना तय है
सवाल यह नहीं है कि निरीक्षण हो रहा है सवाल यह है कि अचानक इतना हड़कंप क्यों है जवाब सीधा है क्योंकि अब दिखावा नहीं चलेगा अब काम दिखाना पड़ेगा
केदारनाथ निरीक्षण से लेकर से लेकर आज अचानक मसूरी रोड तक सीएम का निरीक्षण करने पहुंचना दरअसल एक प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक है जिसमें सबसे ज्यादा दर्द उन्हें हो रहा है जिन्हें अब तक “समय लगेगा” कहना सबसे आसान जवाब लगता था
हल्का सा तंज जरूरी है क्योंकि वर्षों से एक कहावत चल रही थी कि उत्तराखंड में सरकार चलती कम है और फाइलें ज्यादा चलती हैं लेकिन अब लगता है फाइलों को भी दौड़ना पड़ेगा क्योंकि मुख्यमंत्री खुद ट्रैक पर उतर चुके हैं
अब अधिकारी समझ रहे हैं कि मीटिंग में सिर हिलाने से ज्यादा जरूरी है मौके पर काम दिखाना वरना अगली बार निरीक्षण सीधे उनके विभाग के दरवाजे पर हो सकता है
धुरंधर धामी का यह मॉडल एक साफ संदेश है कि शासन अब रिमोट से नहीं चलेगा और जिम्मेदारी अब टेबल से उठकर जमीन पर निभानी होगी
जो अधिकारी इस बदलाव को समझ लेंगे वे सिस्टम के साथ चलेंगे और जो अब भी पुरानी रफ्तार में हैं उनके लिए यह दौर असहज जरूर होने वाला है
कुल मिलाकर यह सिर्फ निरीक्षण नहीं है यह प्रशासन को आईना दिखाने का दौर है जहां जनता पहली बार देख रही है कि सत्ता खुद चलकर उसके दरवाजे आ रही है और यही वह बिंदु है जहां से उत्तराखंड की प्रशासनिक कहानी नया मोड़ ले सकती है।


