विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस पर मैक्स हॉस्पिटल का जागरूकता अभियान, न्यूरोसर्जरी डायरेक्टर डॉ. यशबीर देवान ने बताया, क्यों नहीं पड़ती बड़ी सर्जरी की जरूरत? पढ़िए पूरी खबर….

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देहरादून: सावधानी, सतर्कता, बचाव इन तीनों शब्दों के अर्थ का महत्व हमारे शरीर की स्वास्थ्य प्रणाली के लिए बेहद अहम भूमिका रखता है विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस के अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून ने ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी पर जागरूकता बढ़ाने के साथ इसकी पहचान और सतर्कता पर लोगों को विस्तृत जानकारी दी और ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। अस्पताल ने कहा कि समय पर पहचान, सही समय पर इलाज और उन्नत न्यूरोसर्जरी सुविधाओं तक पहुंच से मरीजों के इलाज के परिणाम और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।

ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। ये ट्यूमर अपने प्रकार, व्यवहार, बढ़ने की गति और गंभीरता के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ ट्यूमर लंबे समय तक कोई लक्षण नहीं दिखाते, जबकि कुछ तेजी से बढ़ते हैं और तुरंत इलाज की जरूरत पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता की कमी और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना अक्सर बीमारी की पहचान में देरी और जटिलताओं का कारण बनता है।

ब्रेन ट्यूमर के सामान्य लक्षणों में लगातार सिरदर्द, दौरे पड़ना, उल्टी होना, हाथों या पैरों में कमजोरी, बोलने में परेशानी, चलते समय संतुलन बिगड़ना, धुंधला दिखाई देना, सोचने-समझने में दिक्कत, याददाश्त कमजोर होना और व्यवहार में अचानक बदलाव शामिल हो सकते हैं। चूंकि इन लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं समझ लेते हैं, इसलिए कई बार डॉक्टर के पास जाने में देरी हो जाती है।

इस मौके पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल न्यूरोसर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. यशबीर देवान ने कहा कि “ब्रेन ट्यूमर के सफल इलाज में समय पर पहचान बहुत महत्वपूर्ण होती है। न्यूरोइमेजिंग, माइक्रोसर्जरी, मिनिमली इनवेसिव तकनीकों और क्रिटिकल केयर में हुई प्रगति के कारण आज इलाज के परिणाम पहले की तुलना में काफी बेहतर हैं। समय पर इलाज मिलने से मरीज बेहतर तरीके से स्वस्थ होकर अपनी सामान्य जिंदगी में वापस लौट सकते हैं।”

डॉ देवान ने कहा कि “हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होता और हर मरीज को बड़ी सर्जरी की जरूरत भी नहीं पड़ती। इलाज का तरीका ट्यूमर के प्रकार, आकार, उसकी स्थिति और मरीज की कुल स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। आज का इलाज केवल ट्यूमर को हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान दिया जाता है कि मरीज अच्छी तरह से स्वस्थ होकर एक सक्रिय और स्वतंत्र जीवन जी सके।”

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि लंबे समय तक न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को नजरअंदाज करने से स्थायी कमजोरी, नजर से जुड़ी समस्याएं, दौरे, बोलने में दिक्कत और जीवन की गुणवत्ता में कमी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए लगातार या बिना किसी स्पष्ट कारण के होने वाले लक्षणों की स्थिति में समय पर न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श और जांच कराना जरूरी है।

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