उत्तराखंड को नहीं चाहिये ऐसे उदंडी पर्यटक, पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार डॉ रमेश खन्ना का लेख…
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हरियाणा के यू ट्यूबर और फ़ेस बुकिये भाईयों ये देखो तुम्हारा एक और भाई मैं वर्तमान परिस्थिति में इसे वायरल नहीं करना चाह रहा था लेकिन तुम लोग लगातार उत्तराखंडियों को कुछ भी बोले जा रहे तो न चाहते हुए भी तुम्हारी ही भाषा में तुम्हारे सवालों का उत्तर दे रहा हुं हमारे उत्तराखंड के लोग देश के किसी भी कोने में हों इस बेहूदा अंदाज में नंगे घुमते कभी नज़र नहीं आयेंगे हमारी संस्कृति संस्कार और उत्तराखंडियत हमें इस तरह की इजाज़त नहीं देती साथ ही उत्तराखंडी तुम्हें ना तो गंगा में बैठकर हुक्का या फिर दारु पीते नज़र आयेंगे ना इस तरह नंगे घुमते हर जगह आख़िर एक ही नाम?
तुम बताओ यदि तुम्हारे घर गाँव व शहर में रात को कोई लफ़ंगा नंगा होकर आवारा बनकर किसी के भी गेट को फाँदने का प्रयास करे और दारु के नशे में धुत्त होकर बिना मतलब के बतमीजी से बात करे तो तुम क्या करोगे देखो इसकी हालत इसे पता नहीं कहाँ इसकी क़मीज़ है कहाँ बनियान और पुछो ईसे कि परसों रात पहाड की शांत वादियों में ईस हालत मे कहाँ घुम रहा था क्या ये घर से ही नंगा होकर निकला था क्या आपकी संस्कृति इस तरह की अनुमति प्रदान करती है और जब हम लोगों ने इससे इसका अता पता पुछने का प्रयास किया तो ये अंधेरे में रफु चक्कर हो लिया हलांकि इसे पकड़ भी सक्ते थे और इसकी फिटनस भी हो सक्ती थी लेकिन हम उस संस्था से आते हैं जहां क़ानून को अपने हाथ में लेने की इजाज़त नहीं आखिर ये किस मंशा से और किस उद्देश्य से अंजान जगह में घुसने का प्रयास कर रहा था पुछना ईससे ?
हर हरियाणवी छोरा ख़राब नहीं होता देश की सरहदों से लेकर ओलंपिक के मैदानों तक हरियाणा ने देश का मान बढ़ाया है मेरे बहुत मित्र हैं हरियांणा से जिनके साथ पारिवारिक व घनिष्ठ संबध हैं लेकिन यैसे लफ़ंगों की वजह से जब पुरी क़ौम बदनाम होती है तो तुम इनको बचाने के चक्कर में उत्तराखंड के लिये कुछ भी बोले जा रहे बेहतर होगा कि आप ऐसे लोगों को उजागर करने में सहयोग करें और ये जहां से भी हों वहाँ की खाप पंचायतों में फ़रमान जारी कर ऐसे परिवारों का हुक्का पानी बंद करें जो अपने समाज व संस्कृति को देश भर में कलंकित करने का काम कर रहे हैं ।
साथियों इसे भी इतना वायरल करो कि इसके गाँव व शहर तक पता चले कि ये घुमक्कड़ी के नाम पर कैसे घुमता है।
यह लेख उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार रमेश खन्ना द्वारा लिखा गया है।

