देशभर के हिंदी भाषा जगत को अपनी बौद्धिक संपदा समर्पित करेंगे शिक्षाविद् डॉ. सुशील उपाध्याय, केंद्रीय हिंदी निदेशालय में हुआ चयन….

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देहरादून: बौद्धिक क्षमता एवं ज्ञान जितना स्वयं को ख्याति और प्रगति प्रदान करता है उतना ही वह एक अतुलनीय संपदा के रूप में भावी पीढ़ी कहे जाने वाले छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की नींव भी बनता है… ऐसे कथन को सार्थकता प्रदान कर रहे हैं रूड़की के लंढोरा स्थित चमन लाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षाविद् डॉ. सुशील उपाध्याय। जिनका चयन भारत सरकार के केंद्रीय हिंदी निदेशालय की ‘प्राध्यापक व्याख्यानमाला’ के लिए किया गया, इस योजना के अंतर्गत डॉ. उपाध्याय गैर हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी विद्वानों, शोधार्थियों तथा हिंदी के विद्यार्थियों से संवाद करेंगे।

केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक प्रो. हितेंद्र कुमार मिश्र द्वारा जारी पत्र में डॉ. सुशील उपाध्याय के चयन की सूचना दी गई। इस योजना के अंतर्गत देशभर से आठ हिंदी विद्वानों का चयन किया गया है, जिनमें चार हिंदी भाषी क्षेत्रों तथा चार गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी के अध्यापन एवं शोध से जुड़े हुए हैं। हिंदी भाषी क्षेत्र से चयनित चार प्राध्यापकों में डॉ. सुशील उपाध्याय भी शामिल हैं। वे उत्तराखंड से चयनित एकमात्र प्राध्यापक हैं।

इस योजना के अंतर्गत डॉ. सुशील उपाध्याय आगामी दिनों में महाराष्ट्र के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में हिंदी के प्राध्यापकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों से संवाद करेंगे। केंद्रीय हिंदी निदेशालय की यह योजना हिंदी एवं गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों के बीच हिंदी भाषा और साहित्य विषयक संवाद को बढ़ावा देने तथा भाषा के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। इसी योजना के अंतर्गत केरल की हिंदी विदुषी प्रो. सिंधु टी.आई. आगामी सितंबर में उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में हिंदी प्राध्यापकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों से संवाद करेंगी।

डॉ. सुशील उपाध्याय ने कहा कि वे गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को हिंदी भाषा, साहित्य और हिंदी परिवेश से जोड़ने का प्रयास करेंगे।उन्होंने बताया कि व्याख्यानमाला के दौरान हिंदी के व्यावहारिक उपयोग, प्रशासन, शिक्षा और व्यवसाय में उसकी भूमिका, हिंदी तथा भारतीय भाषाओं के बीच अनुवाद की आवश्यकता, समकालीन मीडिया में हिंदी की स्थिति, न्यू मीडिया और सोशल मीडिया में हिंदी के बदलते स्वरूप, हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श और दलित साहित्य आदि पर व्याख्यान देंगे।

साथ ही, हिंदी में सृजनात्मक लेखन, सिनेमा और समाज के अंतर्संबंध, नई शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में भारत की भाषिक विविधता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और हिंदी भाषा, हिंदी के माध्यम से करियर निर्माण की संभावनाओं एवं चुनौतियों तथा राजभाषा के रूप में हिंदी के विविध आयामों पर संवाद करेंगे।

केंद्रीय हिंदी निदेशालय के सहायक निदेशक डॉ. दीपक पांडेय ने बताया कि व्याख्यान माला का आयोजन निदेशालय की विस्तार कार्यक्रम योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। इस योजना के जरिए हिंदीतर भाषी क्षेत्रों के हिंदी विद्यार्थियों की अध्ययन यात्रा,

हिंदीतर भाषी हिंदी नवलेखक  शिविरों का आयोजन और राष्ट्रीय संगोष्ठियों भी आयोजित की जा रही हैं।

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