अर्धकुंभ मेले की तैयारी, गंग नहर में आस्था की डुबकी के लिए बन रहे घाट बन सकते है भविष्य में चुनौती, जानिए क्यों….
हरिद्वार: गंगनहर में आस्था की डुबकी के लिए घाटों का नवनिर्माण ना बन जाए भविष्य के लिए चुनौती, पढ़िए हम ऐसा क्यों लिख रहे है….
अर्धकुंभ मेला में श्रद्धालुओं को मोक्ष की डुबकी लगवाने के लिए गंगनहर की बायीं पटरी पर उत्तराखंड पुनर्वास खंड सिंचाई विभाग द्वारा लगभग 3 किलोमीटर की लंबाई में कई घाट बनाए जा रहे हैं। घाट के लिए बनाई गई रिटेनिंग वॉल और पटरी को 5 से 6 फीट चौड़ा करने के कारण नहर का वेटेड क्रॉस-सेक्शन (नहर की चौड़ाई )घट गया…
इससे समान डिस्चार्ज में जल का वेग बढ़ने और वाटर लेवल उठने के साथ दुर्घटना की संभावना हमेशा बनी रहेगी। उत्तर भारत में हरित क्रांति लाने वाली और हरिद्वार से कानपुर तक जाने वाली गंगनहर को लेकर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी आँख मूंदकर बैठे हैं। 5 दिन पूर्व संज्ञान में आने के बाद भी उनके अधिकार वाले अति महत्वपूर्ण सिंचाई प्रकल्प पर उत्तराखंड के अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। सबको अमृत पान करना है लिहाजा उत्तर प्रदेश के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी अनदेखी ओर जांच की बात कर रहे हैं।
बड़ा सवाल अनुमति का है। गंगनहर का संचालन आज भी उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की उत्तरी खंड गंगनहर इकाई के पास है। उत्तराखंड की कार्यदायी संस्था ने इस निर्माण ( गंग नहर पटरी की चौड़ाई बढ़ाने)के लिए यूपी से कोई लिखित एनओसी भी नहीं ली है।
इस पर अधिशासी अभियंता, उत्तरी खंड गंगनहर, रुड़की विकास त्यागी ने स्पष्ट कहा है कि “उत्तराखंड द्वारा ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई है।”
गौरतलब है कि 9 नवंबर 2000 में राज्य विभाजन के बाद से ही गंगनहर के संचालन, परिसंपत्तियों और भूमि के स्वामित्व को लेकर दोनों राज्यों के सिंचाई विभागों में विवाद चलता आ रहा है। यह नया निर्माण दोनों राज्यों के बीच विवाद को और गहरा कर सकता है।


