उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी से जनता का हुआ नुकसान…
शासन के चूक या उत्तराखंड सरकार की नाकामी छोटी सरकार कहे जाने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का आरक्षण चक्र लगातार चुनाव की देरी का कारण बनता रहा, जिसपर पंचायती राज विभाग का होमवर्क हमेशा धरा का धरा रह गया, आज हालात ये है कि ग्राम पंचायतों, ब्लॉक, जिला पंचायतों में प्रशसकों के भरोसे विकास कार्य छोड़ने पड़े, चुनी हुई पंचायत वाली छोटी सरकार ख़त्म हो चुकी है जनता आये दिन चुनाव की राह देख रही है…
लोकतंत्र में चुनावी आरक्षण व्यवस्था को लागू कराना और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराना चुनाव चुनाव आयोग कि जिम्मेदारी है लेकिन उत्तराखंड में राज्य सरकार का पंचायती राज विभाग पिछले एक साल से चेन की नींद लेता रहा हूं आरक्षण रोटेशन हवाई तीर इधर उधर चलते रहे…
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव में आरक्षण रोस्टर को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट उत्तराखंड ने चुनाव संबंधी कार्यवाही पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने इस मामले में सरकार से जबाव मांगा है।
बागेश्वर निवासी गणेश दत्त कांडपाल व अन्य ने याचिका दायर कर कहा कि सरकार ने 9 जून 2025 को एक आदेश जारी कर पंचायत चुनाव के लिए नई नियमावली बनाई थी। साथ ही 11 जून को आदेश जारी कर अब तक पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोटेशन को शून्य घोषित करते हुए इस वर्ष से नया रोटेशन लागू करने का निर्णय लिया है। जबकि, न्यायालय ने पहले से ही इस मामले में दिशा निर्देश दिए हैं।

